गौ माता में सारे देवी, देवता रहते हैं इनकी सेवा व्यर्थ न जाती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : लाल दुपट्टा उड़ गया रे बेरी

गौ माता में..

गौ माता में सारे देवी, देवता रहते हैं

इनकी सेवा व्यर्थ न जाती, हरकोई कहते हैं

गायों की जो सेवा करते हैं

हमेशा आगे बढ़ते हैं

गायों की रक्षा के लिये, विष्णुजी गोपाल बने

गायों के लिये देवता भी, गोपी (और) ग्वालबाल बने

पूजे सारा संसार.. जय गौ मां

ऋषिमुनि परिवार.. जय गौ मां

गायों की सेवा करने से, पाप उतरते हैं

इनकी सेवा व्यर्थ न जाती, हरकोई कहते हैं

गायों की जो सेवा करते हैं

हमेशा आगे बढ़ते हैं

धन्य है वो गौ भक़्त जो, गौशाला बनवाते हैं

धन्य है वो भी जो गायों का, सेवा खर्च उठाते हैं

देवो ऐसा वरदान.. जय गौ मां

मैं भी करूं कुछ दान.. जय गौ मां

गौ सेवा करने वालों के, संकट टलते हैं

इनकी सेवा व्यर्थ न जाती, हरकोई कहते हैं

गायों की जो सेवा करते हैं

हमेशा आगे बढ़ते हैं

आओ ये संकल्प करें कि, गौशाला बढायेंगे

गायों की रक्षा केलिए सब, एक जुट हो जायेंगे

ये है धरम का रूप.. जय गौ मां

ये है पूण्य स्वरूप.. जय गौ मां

अम्बरीष कहता गौ सेवा से, भाग्य संवरते हैं

इनकी सेवा व्यर्थ न जाती, हरकोई कहते हैं

गायों की जो सेवा करते हैं

हमेशा आगे बढ़ते हैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।