तू ही दुर्गा तू ही लक्ष्मी काली माँ,

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू ही दुर्गा तू ही लक्ष्मी काली माँ,

तू ही है शारदा झंडिया वाली माँ,

तेरे वरगा न जग ते होना कोई,

इक तू ही दुनियां दी रखवाली माँ,

साड़े कर्म जमा कर कर्मावाली माँ

एसा हारा तेरा झंदेवालियाँ माँ,

तुही दुर्गा.....

तेरे सबना दे तुही तार दी है मालिक तू सारे संसार दी,

सारे देवी देव गुण तेरा गंदे माँ तेरे दर दा भिदाता सवाली है माँ,

एसा हारा तेरा झंदेवालियाँ माँ,तुही दुर्गा.....

आसा सब दी पूजावे आसा रनिये साड़ी कल वी रखे ता असी जानिए,

तेरे वाजो जाके माँ किस नु हाल दसिए किथे जान तेरे दर से सवाली नही माँ,

साड़े कर्म जमा कर कर्मावाली माँ,एसा हारा तेरा झंदेवालियाँ माँ,

तुही दुर्गा.....

उचे मंदिरा ते झंडे लाल झूल दे,

तेरे लाल एक पल वी न भुल्दे,

रात दिन तेनु वाजा पाए मरदे,

आजा कर के सवारी निराली नही माँ

साड़े कर्म जमा कर कर्मावाली माँ

एसा हारा तेरा झंदेवालियाँ माँ,

तुही दुर्गा.....

आजा रंजीत दी पुकार ते आजा दतिये शुभाष नु तू लाड दे

आज रज रज के माँ तेरा दीदार करिये,

आके भर जा झोली साड़ी वी खाली माँ,

तुही दुर्गा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।