लाल चुनर माँ ओढ़ के आई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लाल चुनर माँ ओढ़के आजा करके शेर सवारी

के बिगड़ी बनाने अब तो आजा माँ जगराते वाली

जय अम्बे शेरावाली जय जगदम्बे मैया राणी

मेरे मन है विश्वास तू मैया आएगी

सबके बिगड़े कारज आज बनाएगी

बीन बोले ही पढ़ लेगी बाते दिल की

पूरी हो जाएगी भक्तों के मन की

चिन्ता हरनी माँ चिंतपूर्णी

सब सुखों की तू ही करनी

अरे ज्वाला माँ के स्वागत सब मिलके बजाओ ताली

जय अम्बे शेरावाली जय जगदम्बे मैया राणी

माँ का जगराता नसीबो से आया है

भक्तों मिलकर दरबार सजाया है

के मैहर करेगी आज माँ मैहरावाली

तेरे दर से नहीं जाता कोई खाली

माँगलो झोली फैलाके सारे

माँ ज्वाला करेगी वारे न्यारे

अरे हो गईं उसकी सफल जिंदगी

जिसने महिमा गा ली

जय अम्बे शेरोंवाली जय जगदम्बे मैया राणी

राज चले दिल्ली में कालका राणी का

गूंज रहा जयकारा माँ झंडेवाली का

गुड़गांवा में शीतला माता गोद भरे

धोलागढ़ वाली माँ पूर्ण काज करें

भोली काँगड़े वाली मैया

देदो ममता की माँ छैया

के तेरे दर पे आया संजय

बनके तेरा सवाली

जय अम्बे शेरोंवाली जय जगदम्बे मैया रानी

कुमार संजय भजन गायक

एवम लेखक 9643435958

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।