नी मैं डाकिए दा शुक्र मनावा चिठ्ठी लेके आया गुरा दी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

ओ,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

चिठ्ठी विच लिखया,सत्संग सुनना-२,

सत्संग सुन कें, वचनां तें चलना-२,

ओ,मेरा सत्संग बिन, ना गुजारा,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

ओ,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

चिठ्ठी विच लिखया,सिमरन करना-२,

सिमरन करकें,शब्द-धुन सुनना-२,

ओ,मेरा सिमरन बिन,नहियों गुजारा, चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

ओ,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

चिठ्ठी विच लिखया,सेवा करना-२,

तन-मन-धन,अपने गुरां नूं सौंपना-२,

ओ,मेरा सेवा बिन,नहियों गुजारा, चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

ओ,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

चिठ्ठी विच लिखया,आरती-पूजा-२,

गुरां बिन तेरा,कोई ना दूजा-२,

तेरा गुरां बिन,नहियों हैं गुजारा,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

नीं मैं डाकिए दां शुक्रर मनावां,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

ओ,चिठ्ठी लैकें आया गुरां दीं-२,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।