आज तो बधाई बाजे महन्दीं पुर में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़-आज तो बधाई बाजे,नींद भगवन में

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

1.अज दैन बधाई विष्नु जी आये,श्री लक्ष्मी

जी नूं साथ ले आये

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

2.अज दैन बधाई ब्रह्मां जी आये,ब्रह्मांणीं

जी को साथ में लाये

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

3.अज दैन बधाई शकंर जी आये,गौरां जी

को साथ में लाये

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

4.अज दैन बधाई राम जी आये,सीता जी

को साथ में लाये

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

5.अज दैन बधाई कृष्ण जी आये,राधा जी

को साथ में लाये

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

6.अज दैन बधाई गुरुदेव आये,और धसका

गाये सारी संगत में

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

महन्दीं पुर वाले की,सालासर वाले की

बधाई है बधाई है,बधाई है बधाई है

आज तो बधाई बाजे,महन्दीं पुर वाले की

आज तो बधाई बाजे,सालासर वाले की

आज तो बधाई बाजे...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।