गौरां ज़रा भोले को समझाना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरां ज़रा भोले को समझाना

धुन- दीदी तेरा देवर दीवाना

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना ॥

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

ना पानी, की कमी है, ना दूध, की कमी है ।

तो गंगा, सजाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥

समझाया तो, फिर भी, ना माना ।

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना...

ना चंदन, की कमी है, ना केसर, की कमी है ॥

तो चन्दा, सजाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥

समझाया तो, फिर भी, ना माना ।

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना...

ना फूलों, की कमी है, न माला, की कमी है ॥

तो नाग़, सजाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥

समझाया तो, फिर भी, ना माना ।

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना...

ना भोजन, की कमी है, ना भोगों, की कमी है ॥

तो भांग, धतूरे की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥

समझाया तो, फिर भी, ना माना ।

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना...

ना महलों, की कमी है, ना मंदिर, की कमी है ॥

तो पर्वत, पे रहने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥

समझाया तो, फिर भी, ना माना ।

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना...

ना पाउडर, की कमी है, ना लोशन, की कमी है ॥

तो भस्म, रमाने की, तुम्हें क्या पड़ी है ॥

समझाया तो, फिर भी, ना माना ।

भोले, छोडो, भाँग का, खाना ॥

गौरां, ज़रा, भोले को, समझाना...

बम बम भोले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।