ओ कान्हा आ जाओ दरस तेरा करेगें हम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – अगर तुम मिल जाओ।

ओ कान्हा आ जाओ,

दरश तेरा करेंगे हम,

ओ कान्हा आ जाओं,

दरश तेरा करेंगे हम,

दरश पाकर तेरा कान्हा,

सफल जीवन करेंगे हम,

ओ कान्हा आ जाओं,

दरश तेरा करेंगे हम॥

बिना तेरे मेरे कान्हा,

कि अब हम जी न पायेंगे,

लगन तुमसे लगा बैठे,

कहो कैसे भूलायेंगे,

लगन तेरी न हो दिल में ओ,

लगन तेरी न हो दिल में,

तो जीना छोड देंगे हम,

ओ कान्हा आ जाओं,

दरश तेरा करेंगे हम॥

तुम्हे हम अपने मन मंदिर में,

कुछ ऐसे बसा लेंगे,

प्रेम तुमसे ही करते हैं,

ये दुनिया को बता देंगे,

कान्हा मेरे कान्हा ओ,

कान्हा मेरे कान्हा,

तुझे ना भूल सकेंगे हम,

ओ कान्हा आ जाओं,

दरश तेरा करेंगे हम॥

तुम्हीं हो श्रष्टि के पालक,

तुम्हीं बंशी बजैया हो,

नन्द बाबा के प्यारे हो,

मां यशोदा के छैया हो,

कहें ‘नेम चन्द’ भईया _ ओ,

कहें नेम चन्द भईया,

तेरा सुमिरन करेंगे हम,

ओ कान्हा आ जाओं,

दरश तेरा करेंगे हम॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।