मईया का यह रूप सुहाना लगता है

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मईया का यह रूप सुहाना लगता है

धुन- दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥

मईया, का यह रूप, सुहाना लगता है ॥

भक्तों का भी, दिल दीवाना लगता है ॥

पल भर में, भर देती है, झोली ख़ाली ॥

इनसे, तो रिश्ता, पुराना लगता है...

मईया, का यह रूप, सुहाना...

लाल जोड़े, में सजी है, चांद सी मईया,

खूब गहनों, में लगे है, प्यारी सी मईया ॥

इनका, तो मुखड़ा, सलोना लगता है ॥

भक्तों का भी, दिल, दीवाना लगता है...

मईया, का यह रूप, सुहाना...

लंबे-लंबे, बालों में, क्या खूब, लगा गज़रा,

तीखे तीखे, नैनों में है, सज़ रहा कज़रा

हाथों में, कंगन, सुहाना लगता है ॥

भक्तों का भी, दिल, दीवाना लगता है...

मईया, का यह रूप, सुहाना...

पीले पीले, शेर पर, बैठी, मेरी मईया,

पार करने,आ गई है, सबकी ये नईया ॥

इनका, तो दरबार, सुहाना लगता है ॥

भक्तों का भी, दिल, दीवाना लगता है...

मईया, का यह रूप, सुहाना...

जय जय माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।