सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ

सेर ते सवार हो के आजा दातीऐ

साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ

राहा विच तेरे असी फूल मां विछाऐ से

फूल मां विछाऐ ने फूल मां विछाऐ से

अऊन दी उडीक विच भवन सजाऐ ने

भवन सजाऐ ने मां भवन सजाऐ ने

चार चंन , जागे विच ला जा दातीऐ

साडे घर जागा फेरा पाजा दाती...|

कृपा तेरी दे नाल जागा करवाया ऐ

जागा करवाया ऐ मां जागा करवाया ऐ

खूशीआ दे नाल असी जसन मनाऐया ऐ

जसन मनाऐया ऐ मां जसन मनाऐया ऐ

दात खूशीआ दी, झोली विच पाजा दातीऐ

साडे घर जागा फेरा पाजा दाती...|

तेरे ता दीदार असी कंजका चो पाऐ ने

कंजका चो पाऐ ने मां कंजका चो पाऐ ने

चरना च सीस माऐ सब ने झूकाऐ ने

सब ने झूकाऐ ने मां सब ने झूकाऐ ने

आ के बच्चेआ से, कषट मिटा जा दातीऐ

साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ ...|

चल के जनाल पिंडों भगत मां आऐ ने

भगत मां आऐ ने मां भगत मां आऐ ने

फल फूल भेंटा नाल नारीअल लिआऐ

नारीअल लिआऐ ने मां नारीअल लिआऐ ने

बले बले पपी दी करा जा दातीऐ

बले बले शान दी करा जा दातीऐ

साडे घर जागा फेरा पाजा दातीऐ ...|

लेखक जसपाल जनाल ,

JASPAL JANAL

8699406500

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।