अब तो आजा साँवरिया रे- नया भजन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अब तो आजा साँवरिया रे- नया भजन

अब तो, आजा... अब तो, आजा...

अब तो,आजा, साँवरिया रे,

मेरे, प्यारे, साँवरिया रे ॥

अब तो, आजा... अब तो, आजा ॥

अब तो,आजा, साँवरिया रे,

मेरे, प्यारे, साँवरिया रे ॥

जिन्हें, देखने को, जिए जा रहें हैं ॥

वो पर्दे, पे पर्दा, किये जा रहें हैं ॥

निकल आओ, परदे से, ऐ मुरली वाले ॥

हमें, तेरा पर्दा, गंवारा नहीं है ॥

अब तो, आजा... अब तो, आजा,

अब तो,आजा, साँवरिया रे...

दो नैन तेरे, दो नैन मेरे ॥

मिलते ही, नैना, चार हुए ॥

ये तो, अपनी, अपनी, किस्मत है ॥

दो, जीत गए, दो, हार गए ॥

अब तो, आजा... अब तो, आजा...

अब तो,आजा, साँवरिया रे...

दुनियाँ का, बन कर देख लिया ॥

अब, तेरा, बन कर देखेंगे ॥

तेरे, नाम में, कितनी, शक्ति है ॥

बरसाने, जाकर, देखेंगे ॥

अब तो, आजा... अब तो, आजा...

अब तो,आजा, साँवरिया रे...

कोई, पागल है, धन दौलत का ॥

कोई, पागल, बेटे नारी का ॥

अरे, असली, पागल वोही है ॥

जो, पागल बांके, बिहारी का ॥

अब तो, आजा... अब तो, आजा...

अब तो,आजा, साँवरिया रे...

अरे, याम, पीने से, क्या फायदा ॥

दो, पल का, नशा, उत्तर जाएगा ॥

मेरे, कान्हा की, मस्ती को, पीकर देखो ॥

सारा जीवन, नशे में, उत्तर जाएगा ॥

पिला दो... जय हो ॥।राधा, नाम की मस्ती ।

पिला दो, श्याम, नाम की मस्ती ।

वोह, आता होगा, वोह, आता होगा ॥

अरे, मैंने मोहन, को बुलाया,

है वोह, आता होगा ॥

वोह, आता होगा, वोह, आता होगा ॥

अब तो,आजा, साँवरिया रे,

मेरे, प्यारे, साँवरिया रे ॥

राधे राधे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।