बोतल भरी शराब की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बोतल भरी शराब की

अरे, क्या कहा, मैं तुझे, भूल जाऊँ,

न तुझे, याद करूँ, न तुझे, याद आऊँ ॥

हो बोतल, भरी, शराब की, काली, को भेंट दूँ ॥

हो तेरा, भवन न, छोड़ूँ माँ... हो... ,

हो तेरा, भवन ना, छोड़ूँ माँ, दुनियाँ, मैं छोड़ दूँ ॥

ओ रानिए... महाँ रानिए... ॥

ओ तस्वीर, से निकल के आ, मुझ को, भी देख ले ॥

अपने, हाथों, से लिखी, मेरी तकदीर देख ले ॥

ओ रानिए... महाँ रानिए... ॥

हो बोतल, भरी, शराब की, काली को...

हो आँखे, भरी, शराब से, सीने में आग है ॥

इस, आग में, जल रहा, तेरा ही लाल है ॥

ओ रानिए... महाँ रानिए... ॥

हो बोतल, भरी, शराब की, काली को...

हो जल, रहा हूँ, आज मैं, जलने, का गम नहीं ॥

तेरे, भवन की, धूल माँ, चंदन से कम नहीं ॥

ओ रानिए... महाँ रानिए... ॥

हो बोतल, भरी, शराब की, काली को...

जय माता की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।