बड़े बन ठन के निकले बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बड़े बन ठन के निकले बिहारी

बड़े, बन ठन के, निकले बिहारी ॥

ये, बताओ, कहाँ, जा रहे हो ॥

ये बताओ, कहाँ, जा रहे हो,

ये बताओ, कहाँ, जा रहे हो ॥

ड़े, बन ठन के... जय हो ॥।निकले बिहारी,

ये, बताओ, कहाँ जा रहे हो ।

तेरे, भक्तों ने, तुम को बुलाया ॥

किन, भक्तों के, घर जा रहे हो ॥

बड़े, बन ठन के, निकले...

तुम, हाथों में, मेहंदी लगाए,

और, अधरो पे, मुरली सजाए ॥

अब, मुरली, बजा के, कन्हईया ॥

ये बताओ, कहाँ, जा रहे हो ॥

बड़े, बन ठन के, निकले...

तेरे, भक्तों ने, कीर्तन कराया,

और, कीर्तन मे, तुम को बुलाया ॥

तुम, कीर्तन में, आ के कन्हईया ॥

ये बताओ, कहाँ, जा रहे हो ॥

बड़े, बन ठन के, निकले...

तेरे, पैरों में, घुंघरू बंधाए

और, छन छन ये, घुंघरू बजाए ॥

तुम, रास, रचाने कन्हईया ॥

ये बताओ, कहाँ, जा रहे हो ॥

बड़े, बन ठन के, निकले...

पीला, पटका, कमर पे बंधाए,

मोर, मुकुट को, सिर पे सजाए ॥

काली, कम्बली को, कांधे पे सजा के ॥

ये बताओ, कहाँ, जा रहे हो ॥

बड़े, बन ठन के, निकले...

शिव, मन्दिर मे, कीर्तन रचाया

नाम, ले ले के, तुझको बुलाया ॥

अपने, भक्तों संग, रास रचाने ॥

मेरी राधे, वहाँ, जा रहा हूँ।

बड़े, बन ठन के, निकले...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।