माँ ऊचे पहाड़ो से नीचे उतर आओ माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ ऊचे पहाड़ो से नीचे उतर आओ माँ

कभी मन्दिर से अपने घर मेरे आओ माँ

ऊचे पहाड़ो.......

मैं कई बार मईया तेरे द्वार घूम आई,

मै नंगे पाव आकर तेरे पाव चूम आई,

अब मुझ पर भी अपनी ममता बरसाओ माँ.

कभी मन्दिर से.......

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नित दहियौ मे मईया गुण गाउ में अम्बे,

बिन तेरे कभी देवी ,मैं रही न जगतम्बे माँ,

अब और मुझे माता तुम न तरसाओ माँ,

कभी मंदिर से.......

मेने बचपन से तेरे उपवास रखा है माँ,

तेरी मूरत को दिल के मेने पास रखा है माँ,

अपनी पुजारन को दर्शन दिखलाओ माँ,

कभी मंदिर से.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।