मुसाफिर जागते रहना

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॥ पावन पाठ ॥

मुसाफिर जागते रहना नगर में चोर आते हैं,

संभालो माल अपने को बांधकर धर सिरहाने में,

जरा सी नींद गफलत में झपट गठरी उठाते हैं,

मुसाफिर जागते रहना.............

कपट का है यहां चलना सभी व्यापार दिनराती,

दिखाकर सूरते सुंदर जाल में यह फसाते हैं,

मुसाफिर जागते रहना ................

कभी किसी का नहीं करना भरोसा इस जमाने में,

लगाकर प्रीत मतलब से हर पल में हटाते हैं,

मुसाफिर जागते रहना..................

ठिकाना है नहीं करना किसी का इस सराय में,

वो ब्रह्मा नन्द दिन दिन मे सभी चल चल कर जाते,

हैं मुसाफिर जागते रहना.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।