ओ सावरे तेरे बिना भी क्या जीना

सुमित सिंहल (पिलखुवा)
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना

ओ सावरे रे, तेरे बिना भी क्या जीना

फूलों में कलियों में, खाटू की गलियों में

तेरे बिना कुछ कहीं न

तेरे बिना भी क्या जीना -२

हर कीर्तन में आस है तेरी, भजनों में तेरी खुशबू है

इस कीर्तन से उस कीर्तन तक, सबकी नज़र में तू ही तू है

तार ये टूटे न ...

तार ये टूटे न, तू मुझसे रूठे न, साथ ये छूटे कभी न

तेरे बिना भी क्या जीना

ओ सावरे रे ...

जाने कैसे अनजाने ही, आन बसा तू मेरे मन में

अपना तन मन खो बैठे हम, दीवानेपन के आलम में

हम तेरे दीवाने...

हम तेरे दीवाने, बस ये तो तू जाने, और ये जाने कोई ना

तेरे बिना भी क्या जीना

ओ सावरे रे...

तुझ बिन मेरी ना जिंदगानी, तुझ बिन मेरी अधूरी कहानी

सिंहल के जी ने का सहारा, यह तो सारी दुनिया जानी

तेरे बिना मेरी

तेरे बिना मेरी मेरे बिना तेरी यह जिंदगी जिंदगी ना

तेरे बिना भी क्या जीना

ओ सावरे रे...

लेखक : सुमित सिंहल (पिलखुवा)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।