सखी बांके बिहारी दे नाल आंख मेरी लड़ गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सखी वांके बिहारी दे नाल

अख मेरी लड़गई, अख मेरी लड़ गई

इदे नैना दा नशा रो कमाल

खुमारी मैनु चढ़ गई -2

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इस जादुगर ऐसा जादु पाया ऐ

इक तकनी च अपना बनाया ऐ

इस बांके दा करके दिदार

सखी मैं तर गई ,सखी मैं तर गई

सखी वांके बिहारी देनाल अख मेरी लड़गई

इदे रूप सदाई मैंनु किता ऐ

इदे नैना दा प्याला ऐसा पीता ए

इदे नैना नाल नैन हे गए चार

सखी मै मर गई ,सखी मैं मर गई

बाके बिहारी दे नाल...

इंदे नैना दा नशा है कमाल

खुमारी मैनु चढ़गई-2

इस बांके विन न गुजारा ऐ

जग देखया मधुप ने सारा ए

जग छुट्दा दे छुटेलख बार,

बांके ने बाह फड़ लई, बांके ने बाह फड़ लई

सखी बांकेबिहारी देनाल

अख मेरी लड़ गई अख मेरी लड़ गई

इंदे नैना दा नशा ऐ कमाल

खुमारी मैनु चढ़गई खुमारी मैने चढ़ गई

इस बाके दा करके दीदार

सखी मैं तर गई, सखी में तर गई

इदे नैना नल नैन हो गए चार

सखी में मर गई सखी मैं मर गई

जग छुट्दा छुटेलख बार

सोहने बांह फड़ लई सोने ने बाह लई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।