नन्दी पे हो के सवार भोला जी चले दुल्हा बनके

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नन्दी पे हो के सवार

नन्दी पे, हो के सवार,

भोला जी, चले दुल्हा बनके ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके

भोला जी, चले दुल्हा बनके ॥

खा के, धतुरा और भांग... ( बम भोले ) ॥

भोले जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

नन्दी, का घूंघरू, छम-छम बोले ॥

भोले, जी का डमरू, डम डम बोले ॥

कांधे पे, नाचे काला नाग़... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

भूत, प्रेतों का, देख बराती ।

सारे, नगर में, भगदड़ मची ॥

मच गया, हा हा कार... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

गौरां, की माता, स्वागत को आई ॥

देख के, भोले को, वोह घबराई ॥

हाथों से, छुट गयो थाल... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

गौरां, री तेरी, किस्मत खोटी ।

दूल्हा, सौ बर्ष, तेरी आयु छोटी ॥

कैसे, निभाएगी साथ... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

गौरां ने, माँ को, समझाया ।

तीन, लोक का, नाथ है आया ॥

भरे, सब के वो भंडार... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

नारद, जी उठ, बोले माता ।

भोले, हैं सारे, जग के विधाता ॥

गौरां के, खुल गयो भाग... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

भोला, जी पहुंचे, मंडप माहीं ।

लगन, की देखो, हुई तैयारी ॥

फेरे हुए, गौरां के साथ... ( बम भोले ) ॥

भोला जी, चले दुल्हा बनके...

नन्दी पे, हो के सवार...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।