गहवर को करले वास

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

????श्री हरिदास ????

गहवर को करले वास,तोहे

राधा रानी मिल जाएगी

राधा रानी मिल जायगी,तोहे

ठकुरानी मिल जायेगी

गहवर को करले वास...

1.कुंड कुंड जहां भरे सरोवर,

झरना झरे खिले कमल सुलोकर

जहां भंवर करे गुन्जांर,तोहे

राधा रानी मिल जाएगी

गहवर को करले वास,तोहे

राधा रानी मिल जाएगी

राधा रानी मिल जायगी,तोहे

ठकुरानी मिल जायेगी

गहवर को करले वास...

2.मन मोहन बन मोरा आयो,

मोर कुटी पे आनंद छायो

जहां मोर मचा रहे शोर,तोह

राधा रानी मिल जाएगी

गहवर को करले वास,तोहे

राधा रानी मिल जाएगी

राधा रानी मिल जायगी,तोहे

ठकुरानी मिल जायेगी

गहवर को करले वास...

3.जन्म जन्म मिले बृज को वासा,

सखी रंगीली की यही अभिलाषा

यही विनती है कर जोर,तोहे

राधा रानी मिल जाएगी,

गहवर को करले वास,तोहे

राधा रानी मिल जाएगी

राधा रानी मिल जायगी,तोहे

श्यामा प्यारी मिल जायेगी

गहवर को करले वास...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।