मंदिर ले निकले जब जोत

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

दरसन बर वो तरसे,नयना ले आशु बरसे,

निकले महामाई गंगा नहाये बर...

•देखत देखत मोर हिर्दय धक धकाये

•जोत जवारा मंदिर ले बहिराये

चमकत हे बाना भाला ।

मोंगारा के गुथे माला ।

दिखत हे बड़ निराला ।

जवारा आला आला ।

मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

•भोहे जवारा देवी पावे उसलाए,

•धीरे धीरे माई सब तोरे वो रेंगाए,

लागत हे जइसे मेला ।

भगत के जूरे रेला।।

छोड़े जावत हस अकेला ।

संग बाना बरन खेला ।

मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

•जावत हस दाई जाके गंगा म नहाबे,

•नव दिन के गौतम जल धारा म थिराबे,

कर डारे हव तमाशा ।

दुनिया भर तीन पचाशा ।

तब छोड़े नई हव आशा ।

हिर्दय म करबे बाशा ।

मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।