तेरी मौज

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

(मां...

मेरी मां...

मां...

मेरी मां...)

तू दे चाहे ना दे माए,

तू दे चाहे ना दे माए...

तू दे चाहे ना दे माए,

तेनू ऐयो कहने आं...

तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं ॥

(तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं)

तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं...

(जय जय मां

जय जय मां

जय जय मां

जय जय मां)

जिंदगी मेरी चलदी दाती, तेरे नाम सहारे ॥

(तेरे नाम सहारे)

जो भी दर ते आ जावे मां, उसनूं पार उतारे ॥

(उसनूं पार उतारे)

ओ ओ ओ ओ ओ

जिंदगी मेरी चलदी दाती, तेरे नाम सहारे ॥

जो भी दर ते आ जावे मां, उसनूं पार उतारे ॥

जिस दिन दा तेरा पल्ला फड़िया, ऐयो कहने आं...

(तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं)

तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं...

स्वर्ग बनाया जिंदगी नूं, मेरी डूबदी नाव बचाई ॥

(डूबदी नाव बचाई)

मेरे हर एक दुख सुख विच, तू आप मां होई सहाई ॥

(आप मां होई सहाई)

स्वर्ग बनाया जिंदगी नूं, मेरी डूबदी नाव बचाई ॥

मेरे हर एक दुख सुख विच, तू आप मां होई सहाई ॥

तेरी हर इक गल्ल नूं मां, सिर माथे लेने आं...

(तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं)

तू दे चाहे ना दे माए...

(जय जय मां

जय जय मां

जय जय मां

जय जय मां)

सुख दे चाहे दुख दे, पर तू नाल रही मां मेरे ॥

(नाल रही मां मेरे)

छड्ड के दुनियादारी, नौकर बन जां दर दी तेरे ॥

(बन जां दर दी तेरे)

मां...

सुख दे चाहे दुख दे, पर तू नाल रही मां मेरे ॥

छड्ड के दुनियादारी, नौकर बन जां दर दी तेरे ॥

खेड़ा तेरे कोलों लए, गुड्डू नाल कहने आं...

(तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं)

तेरी मौज च रहने आं,

ताहीं जय मां कहने आं...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।