तोर जोत जवारा दाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तोर जोत जवारा दाई,तोर जोत जवारा वो.. ॥

चढ़ -होवत हे विसर्जन दाई,लागे जीव कल्पन दाई

सातो बहिनी बोहे जवारा,जावय गंगा नहाये

आगू आगू सेऊक चले,जस पचरा ल गाये

चढ़ -आंखी-आंखी म झूले दाई =2

होवत हे विसर्जन दाई...

सरधा भगती के जोत जवारा,निकले हे आरा पारा

पड़ा बईगा मन ह बांधे, गांव शहर पारा पारा

चढ़ - सबके भाग हा जागे दाई =2

होवत हे विसर्जन दाई...

कोनो हा दाई नरियल लेवय, कोनो हा लेवये बाना

झान जा न झान जा न दाई,मोला झन रोवना

चढ़ - आशीष ल देबे दाई =2

होवत हे विसर्जन दाई...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।