दुर्गा जी की आरती_आरती जग जननी मै तेरी गाऊँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं।

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं।

तुम बिन कौन सुने वरदाती।

तुम बिन कौन सुने वरदाती।

किस को जाकर विनय सुनाऊं।

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं।

असुरों ने देवों को सताया।

असुरों ने देवों को सताया।

तुमने रूप धरा महामाया।

तुमने रूप धरा महामाया।

उसी रूप का मैं दर्शन चाहूँ॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

रक्तबीज मधु कै सब मारे।

रक्तबीज मधु कै सब मारे।

अपने भक्तों के काज सँवारे।

अपने भक्तों के काज सँवारे।

मैं भी तेरा दास कहाऊं॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती तेरी करू वरदाती।

आरती तेरी करू वरदाती।

हृदय का दीपक, नैयनो की बाति।

हृदय का दीपक, नैयनो की बाति।

निसदिन प्रेम की ज्योति जगाऊं॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

ध्यानु भगत तुमरा यश गाया।

ध्यानु भगत तुमरा यश गाया।

जिस ध्याया माता, फल पाया।

जिस ध्याया माता, फल पाया।

मैं भी तेरे दर सीस झुकाऊं॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती तेरी जो कोई गावे।

आरती तेरी जो कोई गावे।

चमन सभी सुख सम्पति पावे।

चमन सभी सुख सम्पति पावे।

मैया चरण कमल रज चाहूँ॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

तुम बिन कौन सुने वरदाती।

तुम बिन कौन सुने वरदाती।

किस को जाकर विनय सुनाऊं॥

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।