दूरगा रईपुरहिन लागे ना

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

दूरगा रईपुरहिन लागे न.. जागे हमर भाग जागे ना =2

चढ़ -सुग्घर के रितवा छागे, माता के मनला भागे,

अंगना म मेला लागे ना... जागे हमर भाग

जगजाननी जगतरण माता, जगके तही खेवइया वो

भव सागर के बिच भवर ले,नइया पार लगइया वो

छोटे माई बड़े माई शीतला लक्ष्मी,कतका नाव धराइया

चढ़ - जग मा तै छाहित होगे, घर घर में पूजीत होगे,

जस ह तोर जगमा छागे ना ...जागे हमर भाग

किसिम-2 के रिकिम रिकिम के,रूप बरन दरसाये वो

भल मंजा के छलके माता, देखत मन हरसाये वो

झलक देख मन फुलकन लागे, आसन दियो लगाये वो

चढ़ - सेउक तोर सेवा म आगे, आगे ले आगू आगे ॥

अंतस म तिहि समाये ना... जागे हमर भाग

तोर देवाला दुनिया आये,दरसन बर महामाया वो

दरसन करधन धन गोहराये, शीतला मोर महामाया वो

तैतिस कोती के देवता आये किंदर साज सजईया वो

चढ़- नारद धर वीणा आये, तोरे जयकारा लगाये,

जन जन म जस बगरागे ना... जागे हमर भाग

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।