तू कहा है बता सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कोसी देखा होडल देखा फिर देखा बंचारी

और बामनीखेडा देखा पाया ना गिरधारी

कोसी देखा होडल देखा फिर देखा बंचारी

और बामनीखेड़ा देखा पाया ना गिरधारी

मै तो दुनिया में डोला क्या पलवल क्या बहरोला

कही धूप मिली कही छाव रे मै तो ढूंडू तुझे गाँव गाँव रे

तू कहा है बता सांवरे मैं तो ढूंडू तुझे गांव गांव रे

पाया नहीं चितचोर मैंने ढूँढा चऊ और मेरे दुखने लगे पाव रे

मैं तो ढूंडू तुझे गांव गांव रे

मथुरा ढूढा गोकुल ढूँढा ढूंढ लिया वृन्दावन

बरसाने की गालिया ढूंडी ढूंढ लिया गोवर्धन

ढूँढा मैंने दिन रैन पर पाया नहीं चैन

कही धूप मिली कही छाव रे

मैं तो ढूंड़ू तुझे गांव गांव रे

जयपुर दिल्ली चंडीगढ़ से पूरी द्वारका आया

क्या कलकत्ता और क्या मुंबई तू ना कही मिल पाया

ढूंढ लिया मद्रास अब तो आजा मेरे पास

देके आवाज़ मैं बुलाऊ रे

मै तो ढूंडू तुझे गांव गांव रे

लुका छुपी का खेल छोड़ दे अब तो प्रीतम प्यारे

क्यों तरसाए और सांवरिया तू जीता हम हारे

कहे पंडित सतीश ले झुकाया मैंने शीश

अब तो तेरे हवाले नाव रे

मैं तो ढूंडू तुझे गांव गांव रे

भजन गायक - अमन वशिष्ठ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।