चले सगुरी नहाय

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

चले सगुरी नहाय,माता भुवन ले निकल के ॥

चढ़ -ऐ माता भुवन ले निकले के हो = 2

ये कोन कोड़ाय ताल सगुरी, कोन बांधे हे पार ।

कोन करे रखवारी,चले गंगा के पार,

माता भुवन ले निकल के...

राम कोड़ाय ताल सगुरी,लक्षमण बांधे हे पार ।

लंगूर करें रखवारी,चले गंगा के पार,

माता भुवन ले निकल के...

चढ़ -ऐ माता भुवन ले निकले के हो = 2

चले सगुरी नहाय,माता भुवन ले निकल के

के वो कोसन ताल सगुरी,के कोसन के पार

के कोसन रखवारे,चले गंगा के पार,

माता भुवन ले निकल के...

आठ कोसन ताल सगुरी, नव कोसन के पार

दास वो कोसन रखवारे, चले गंगा के पार

माता भुवन ले निकल के...

चढ़ -ऐ माता भुवन ले निकले के हो = 2

चले सगुरी नहाय,माता भुवन ले निकल के

कोन दिशा हे ताल सगुरी, कोन दिशा हे पार

कोन दिशा हे रखवारे,चले गंगा के पार,

माता भुवन ले निकल के...

पुरब दिशा हे ताल सगुरी, पश्चिम हावे पार

उत्तर दिशा ताल सगुरी, चले गंगा के पार

माता भुवन ले निकल के...

चढ़ -ऐ माता भुवन ले निकले के हो = 2

चले सगुरी नहाय,माता भुवन ले निकल के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।