मज़ा क्या है गुरु नाम में

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॥ पावन पाठ ॥

मजा क्या है गुरु नाम में ये मुझको पता ही ना था।

सारा जीवन गुजर ही गया, मैं तो पगला था नादान था॥

मजा क्या है गुरु नाम में...

दर आया तो मालूम हुआ,तेरी भक्ति का कायल हुआ।

देखी महिमा तुम्हारी प्रभु, वरना दुनियां में हैरान था।

मजा क्या गुरु नाम में...

मैं तुमसे बहुत दूर था, तेरी माया से मगरुर था।

तूने हस्ती बढ़ादी मेरी वरना जग से परेशान था॥

मजा क्या है गुरु नाम में..

भाग्य मेरे थे गुरुवर मिले, फूल जीवन में मेरे खिले।

तूने कीमत बड़ा दी मेरी वरना दुनिया में कंगाल था॥

मजा क्या है गुरु नाम में...

प्रेम भक्ति में जब से लगा, तेरे चरणों में जब से पड़ा।

नशा ऐसा हुआ नाम का वरना दुनिया में मदहोश था॥

मजा क्या है गुरु नाम में ये मुझको पता ही ना था।

सारा जीवन गुजर ही गया मैं तो पगला था नादान था।

[डॉ सजन सोलंकी]

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।