मइया लाल चुनरिया में

ज्योति नारायण पाठक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मइया लाल चुनरिया में ,

तूने मोह लिया जग सारा,

मइया दरसन से तेरे,

अब जागा भाग हमारा,

मइया लाल चुनरिया में,

तूने मोह लिया जग सारा....

मेरे मन में बसी मइया,

तूझे हरपल मैं ध्याऊँ,

तूझे हरपल मैं ध्याऊँ,

अब छोड़ तूझे मइया,

और कहाँ जाऊँ,

अब और कहाँ जाऊँ,

मइया अपने आँचल का,

दे दो मुझे सहारा,

मइया लाल चुनरिया में ,

तूने मोह लिया जग सारा,

मइया दरसन से तेरे,

अब जागा भाग हमारा....

मइया तेरे सिवा जग में,

कुछ और ना अब चाहूँ,

कुछ और ना अब चाहूँ,

टूटी फूटी बानी से,

बस गीत तेरे गाउँ,

मैं गीत तेरे गाउँ,

जयकार से तेरे मइया,

अब गूंज उठे जग सारा,

मइया लाल चुनरिया में,

तूने मोह लिया जग सारा,

मइया दरसन से तेरे,

अब जागा भाग हमारा......

रचना: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।