शेराँ वाली के भवन में कोयल बोले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेराँ वाली के भवन में कोयल बोले

शेराँ वाली, के भवन में, कोयल बोले ॥

ओ कोयल बोले, कि मेरा मन डोले ॥

मेहराँ वाली, के भवन में, कोयल बोले ।

शेराँ, वाली के, भवन में, कोयल बोले...

माँ हरियल पीपल, बाहर भवन के, पीछे है लगवाया ॥

ओ लाल ग़ुलाबी, झंडा भवन पे, लहर लहर लहराया,

शेराँ वाली, के भवन में, कोयल बोले...

माँ पाँचों पांडवां, भवन बनाया, अर्जुन चवर ढुलाया ॥

ओ अकबर सा, सम्राट भवन में, नंगे पैरीं आया,

शेराँ वाली, के भवन में, कोयल बोले...

माँ सेवक आएँ, रात जगाएँ, जय जय अम्बे हो रही ॥

ओ चौंहसठ योगनी, बाहर भवन के, नाचे दे दे फ़ेरी,

शेराँ वाली, के भवन में, कोयल बोले...

माँ सात दीप, नौं खंड में है, तेरा भवन निराला ॥

ओ हनुमान, पहरे पे रहता, लाल लंगोटे वाला,

शेराँ वाली, के भवन में, कोयल बोले...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।