लंगूर नई मानत हावे ओ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

(2बार)

मास असाड़ सुमन घन बरसे, बन बन बोलत मोरा

साड़ी पहिर के निकले ओ माता, मोहत चंन्द्र चकोरा

मास असाड़ सुमन घन बरसे, बन बन बोलत मोरा

साड़ी पहिर के निकले ओ माता, मोहत चंन्द्र चकोरा

लंगुरे रिसाई गे हे ओ

मना देबे माता लंगुरे रिसाई गे हे ओ

लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

भादो के अंधियारी ओ माता, काल भयानक राते

बिजली चमके जिया मोरे धड़के, चमक उठे ममराते

भादो के अंधियारी ओ माता, काल भयानक राते

बिजली चमके जिया मोरे धड़के, चमक उठे ममराते

लंगुरे रिसाई गे हे ओ

मना देबे माता लंगुरे रिसाई गे हे ओ

लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

सात हाथ मा शास्त्र बिराजे, आठवें खप्पर खाई

मुंड के माला पहिरे माता, काल बरन हो जाई

सात हाथ मा शास्त्र बिराजे, आठवें खप्पर खाई

मुंड के माला पहिरे माता, काल बरन हो जाई

लंगुरे रिसाई गे हे ओ

मना देबे माता लंगुरे रिसाई गे हे ओ

लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

मना देबे माता लंगुरे नई मानत हावै ओ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।