तेरे नाल हमेशा रेहँदी

कुलदीप ( राय साब)
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुनियांदारी दे विच कल्ला होके बे गया सी

अपना आप मैं सबकुज लगदा खो के बे गया सी

सुपने दे विच राती आ के मां मैनू एह केन्दी

तूं भागता क्यों घबरौंदा ऐं मैं तेरे नाल हमेशा रेहन्दी (2)

मेरे हुनदिया दस तूं भगतां क्यों डोलदा ऐ

अंदर झाती मारलै की तूं बाहर टोलदा ऐ

करके मैनू याद देख लईं जदो मुसीबत पेंदी

तूं भागता क्यों घबरौंदा ऐं मैं तेरे नाल हमेशा रेहन्दी (2)

मैनू मेरी मंजिल दा मां राह दिखा गइऐं

गेट चौरासी वाले तो वी मुक्त करा गइऐं

ऐंवें तानी सारी दुनिया आ के चरनी ढैदीं

तूं भागता क्यों घबरौंदा ऐं मैं तेरे नाल हमेशा रेहन्दी (2)

लड़ नी तेरा शाडना मां सागर ने ठान लिया

वांग तजिंदर तेरी मां शक्ति नू जान लिया

लढं नी तेरा शाडना मां कुलदीप ने ठान लिया

वांग तजिंदर तेरी मां शक्ति नू जान लिया

नाम तेरे दी चढ़ी खुमारी हुन ना कदे वी लेहंदी

तूं भागता क्यों घबरौंदा ऐं मैं तेरे नाल हमेशा रेहन्दी (2)

सिंगर– संदीप सागर

लेखक - कुलदीप ( राय साब)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।