केडे बहाने आवां दातिए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

केडे बहाने आवां दातिए

केडे बहाने आवां

जेह मैं होंदा मोर जंगल दा ,

पहला पांधा आवा दातिये

जे मैं होंदा पंछी गगन दा ,

उडदा उडदा आंवा दातिए ,

जे मैं होंदा रंग ललारी ,

चोला रंग ल आंवा दातिए ,

जे मैं होंदा भगत मैया दा ,

भेंटा गांदा आवा दातीये ,

जे मैं होंदा शेर जंगल दा

गजदा गजदा आंदा दातिए ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।