लगी ए प्रीत

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगी ए प्रीत, यीशु नाम, हो -2

हुण मैं ओहदा, हो गया -2

ज़िन्दगी निराश सी, जीण दी न आस सी,

जदों मैं रेन्हदा सी, ओहतो दूर

होया सी मैं भुलेया, जग विच रुलेया,

ख़्वाब होए सी, चूर चूर -2

बनी ज़िन्दगी ए ठीक यीशु नाल, हो -2

हुण मैं ओहदा, हो गया -2

उस नाल प्यार, मैनू होया,

दिल दा करार, मैनू होया -2

छडे न त्यागे, ऐसा महबूब मिलेया

उजड़ेया सी जो, मेरा गुलशन खिलेया

अखियाँ च वसेया, दिल मेरा हसेया,

डुबेया रेंहदा सी, गमां नाल

दिल नूं तसल्ली मिली, आस ए अवल्ली मिली,

लगी ए जदों दी यीशु नाल -2

होया जदों नज़दीक यीशु नाल, हो -2

हुण मैं ओहदा, हो गया -2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।