सेठ मारो मंडपिया वालो रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सेठ मारो मंडपिया वालो रे

सेठ मारो मुरली वालो रे

सेठ मारो भाग्य सुधारे वो

चतुर्भुज मंदिर में बैठियो वो

श्याम रंग सूरतिया प्यारी मुरली मन में बजी

राजा हो या रंक कोई सबका मनडा में तू ही

सेठ मारो मंडपिया वालो रे

श्याम मारो मुरली वालो रे

सेठ मारो भाग्य संवारे वो

चतुर्भुज मंदिर में बैठियो

मन्नत मांगे जो भी सांवरिया पल में पूरी करदी

खाली हाथ ना कोई जावे सब की झोलिया भरदी

सेठ मारो मंडपिया वालो रे

श्याम मारो मुरली वालो रे

सेठ मारो भाग्य संवारे वो

चतुर्भुज मंदिर में बैठियो

भोलाराम जी के सपने आया तीन मुरता दिखी

बागुंड का कांकड़ में भगतां तीन मुरता निकली

सेठ मारो मंडपिया वालो रे

श्याम मारो मुरली वालो रे

सेठ मारो भाग्य संवारे वो

चतुर्भुज मंदिर में बैठियो

तीन मूरत में एक ही सूरत एक मंडपिया में बैठी

महावीर भजना में गावे सुनलो कृष्ण मुरारी।

सेठ मारो मंडपिया वालो रे

श्याम मारो मुरली वालो रे

सेठ मारो भाग्य संवारे वो

चतुर्भुज मंदिर में बैठियो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।