मेरी माँ का डोला आया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माँ का डोला आया

मेरी माँ का, डोला आया, जैकारा गूँजे, गली गली ॥

जैकारा गूँजे, गली गली, जैकारा गूँजे, गली गली ॥

शेराँवाली का, डोला आया, जैकारा गूँजे, गली गली ।

मेरी माँ का, डोला आया, जैकारा गूँजे...

जब मईया, मेरे शहर में आई ॥

मैंने, ऐसा शोर मचाया, सब भागे दौड़े, गली गली ॥

सब भागे दौड़े, गली गली, सब भागे दौड़े, गली गली ।

मेरी माँ का, डोला आया, जैकारा गूँजे...

जब मईया, मेरे द्वार पे आई ॥

मैंने ऐसे चरण धुलाया, गंगा बह गई, गली गली ॥

गंगा बह गई, गली गली, गंगा बह गई, गली गली ॥

मेरी माँ का, डोला आया, जैकारा गूँजे...

जब मईया, आँगन में आई ॥

मैंने, ऐसी ज्योत जगाई, चमकारा, हो गया गली गली ॥

चमकारा हो गया, गली गली, चमकारा हो गया, गली गली ॥

मेरी माँ का, डला आया, जैकारा गूँजे...

जब मईया, मंदिर में आई ॥

मैंने, ऐसा भोग लगाया, भंडारा हो गया, गली गली ॥

भंडारा हो गया, गली गली, भंडारा हो गया, गली गली ॥

मेरी माँ का, डोला आया, जैकारा गूँजे...

जब मईया, आसन पर बैठी ॥

मैंने ऐसा भजन सुनाया, जगराता हो गया, गली गली ॥

जगराता हो गया, गली गली जगराता हो गया, गली गली ॥

मेरी माँ का, डोला आया, जैकारा गूँजे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।