आजा आजा री भवानी मैया,शेर पे चढी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आजा आजा भवानी मैया, शेर पे चढी ।

शेर पे चढी री, मैया शेर पे चढी ॥

एक हाथ त्रिशूल विराजे, दूजे में है थाली ।

सबसे पहले तोय मनाएं, कलकत्ते की काली ॥

बावन भैरू छप्पन कालवा, जगन चाले अगाड़ी।

भूरा शेर पे करे सवारी, लांगुरियो सपनाणी ॥

नल राजा ने तोय बाडा, लखिया बन के मांहिं ।

गजमोतिन सूं ब्याव करायो, दानो दियो मरै ॥

इन भगतन ने तोय मनाई, या बस्ती के माही ।

इन भगतन की लाज राखजा, भरी सभा के माही ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।