पईया लागव मै तोरे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मावलिया मोरे मावलिया ॥

पईया लागव मै तोरे,मावलिया मोरे मावलिया ॥

सगरो जगत तोरे फुवरिया ॥

फुलवरिया हो मोरे मावलिया मोरे मावलिया

सनन सनन पुरवाई चले,जीवरा ह डोलन लागे

धरती म देवी सकती जनमें,सरग सकल हर सागे

इक्कीस बहिनिया करे ओलवरिया ॥

ओलवरिया हो मोरे मावालिया..

खाडा खप्पर बाना तीरशूलधरे,सुरुज कस लहलहाये

अस्तुति गाये देवता सुमिरे, हमरो पीरा ल देनासाये

अंगले बहिरथे मईया जोगनिया ॥

जोगनिया हो मोरे..मावालिया

असुरन ल मारे रन ललकारे,बरम पाप समागे

कोन जनी कइसे रचना तोरे,अलहन बरोबर झपागे

तोरे मया हे अगम हिंगलजिया ॥

हिंगलजिया हो मोरे.. मावालिया

जगजननी मईया सगरी पहुंचे,लहरा लेवत हे गंगा माई हो माँ

बुढकी नहाय दुर्गा निछमल होगे,बरम हईता धोवाई

डुबकी लगाले गौतम एक बेरिया ॥

एक बेरिया हो मोरे मावालिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।