देव जी सोभाखेड़ी माए बनयो देवरो

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॥ पावन पाठ ॥

देव जी सोभाखेड़ी माए बनयो देवरो ।

देव जी सोभाखेड़ी माए बनयो देवरो ।

थारे आवे आवे भगत हजार , भगता की लजा रखिलिजो

थारे आवे आवे भगत हजार , भगता की लजा रखिलिजो

देवजी बांझा भी आवे ने शरने अरज करे ,

अरे देवजी बांझा भी आवे ने शरने अरज करे ,

योतो बांझा घर पालनियो बंधावे जो सोभाखेड़ी आई गयों

देवजी सोभाखेड़ी माए ...

देवजी ढूखिया भी आवे ने शरने अरज करे ।

अरे देवजी ढूखिया भी आवे ने शरने अरज करे ।

इना दुखिया रा दुखरा मिटावे जो सोभाखेड़ी आई गयो

देवजी सोभखेड़ी माए ...

अरे आष्टा छेत्र के माए में तो सोभाखेड़ी प्यारी वो

सोभाखेड़ी माए में म्हारा देव मॉल पूजवाया वो

प्यारा प्यारा लागे घना प्यारा प्यारा लागे म्हाने देव धनी

देव धनी हो जी ...

अरे सोभाखेड़ीं माई में म्हारा नारायण पुजवाया हो

देवराज पंडाजी थारा सेवक प्यारा प्यारा हो

देवराज पंडाजी थारी आरती उतारे हो

अरे देव जी सोभाखेड़ी माए बनयो देवरो ।

थारे आवे आवे भगत हजार , भगता की लजा रखिलिजो

भगता की लजा रखिलिजो

भगता की लजा रखिलिजो

भगता की लजा रखिलिजो

बोलिए देव धनी दरबार की जय

सोभाखेड़ी सरकार की जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।