रोता है क्यूँ तु बावरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रोता है क्यूँ तु बावरे... रख तो ज़रा सबर...

दिनों का नाथ साँवरा...लेगा तेरी खबर...

कोई यहां नहीं तेरा...आंशु जो पोछ दे...

इस जग की रित है यही...इतना तु सोच ले...

दुनियां को भुल श्याम से...बस तु उम्मीद कर...

सेठों का सेठ है यहां...बैठा जो सामने...

ज़िनको भी देखो वो यहां...आता है मांगने...

राजा हो य़ा हो रंक वो...मांगे है बे फिकर...

दर दर झुकाना शिश को... अच्छा नहीं कहीं...

करता जो भगतों की फिकर...दातार है वही...

इनकी कृपा हुई तभी...आया तु द्वार पर...

इस दर की बात क्या कहुँ...आया जो हार कर...

हारे का साथी श्याम है...लिखा है द्वार पर...

कैलाश पे यकीन कर...चौखट पे रख दे सर...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।