रंग डारो ना बिच बाज़ार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रंग डारो ना बीच बाज़ार,

श्याम मैं तो मर जाओंगी

रंग डारो ना बिच बाज़ार...

आज ही पहनी मैंनें नई चुनरिया,

वा में लग रहयो गोटा किनरिया

आई करके मैं सोलह श्रृगांर,

कैसे मैं बच पाओँगी

रंग डारो ना बीच बाज़ार,

श्याम मैं तो मर जाओंगी

रंग डारो ना बिच बाज़ार...

मुख पे मेरे गुलाल मलो ना,

बेदर्दी मेरे संग चलो ना

हाय खोलो ना घूँघटा हमार,

कछु ना मैं कर पाउगीं

रंग डारो ना बीच बाज़ार,

श्याम मैं तो मर जाओंगी

रंग डारो ना बिच बाज़ार...

देखो श्याम मेरा घूँघटा खोलो ना,

चुप ठाड़ो तुम कछु बोलो ना

मिले नैनों से नैंना हमार,

जीते जी मैं मर जाऊंगी

रंग डारो ना बीच बाज़ार,

श्याम मैं तो मर जाओंगी

रंग डारो ना बिच बाज़ार...

इकली रह गयी गहबर वन में,

सखी सहेली काहु ना संग में

हाय डरपे है जीयरा हमार,

श्याम मैं तो मर जाऊंगी

रंग डारो ना बीच बाज़ार,

श्याम मैं तो मर जाओंगी

रंग डारो ना बिच बाज़ार...

अब के छोड़ देयो रे कान्हा,

सास ननंद का कहा ना माना

हाथ जोड़े हैं बांवरी सरकार,

सखींयन संग आओंगी

रंग डारो ना बीच बाज़ार,

श्याम मैं तो मार जाओंगी

रंग डारो ना बिच बाज़ार...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।