हम तो वृन्दावन जाएंगे , होली कान्हा संग मनाएंगे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हम तो वृन्दावन जाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे ,

कान्हा के संग होली का, मजा कुछ और है ,

हम सब के दिल का तो, कान्हा चितचोर है ,

कान्हा के संग होली का, मजा कुछ और है ,

हम सब के दिल का तो, कान्हा चितचोर है ,

चितचोर को रंग लगाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे,

हम तो वृन्दावन जाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे ,

कान्हा जी और राधा जी के, हम है दीवाने ,

हर साल जाते है , उनको रंग लगाने ,

कान्हा जी और राधा जी के, हम है दीवाने ,

हर साल जाते है , उनको रंग लगाने ,

दोनो को रंग लगाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे ,

हम तो वृन्दावन जाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे ,

सच सच कहो , कोन चलने को तेयार है ,

किस किस को , हमारे कान्हा जी से प्यार है ,

सच सच कहो , कोन चलने को तेयार है ,

किस किस को , हमारे कान्हा जी से प्यार है ,

कान्हा जी को रंग लगाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे ,

हम तो वृन्दावन जाएगे , होली कान्हा संग मनाएगे ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।