मेरी चुनर पे रंग गयो डाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

निकली थी ओढ़ के में पीली चुनरिया,

जाने कहा से सखी आयो कन्हैया,

निकली थी ओढ़ के में पीली चुनरिया,

जाने कहा से सखी आयो कन्हैया,

पीली मेरी चुनर को कर गयो लाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

विनती करी मेने हाथ जोड़ के ,

कोशिश करी मेने बचने की दोड़ के,

विनती करी मेने हाथ जोड़ के ,

कोशिश करी मेने बचने की दोड़ के,

पीछे पीछे दोड़ा वो तो ले के गुलाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

कुछ भी सखी में कर ना पाई,

जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,

कुछ भी सखी में कर ना पाई,

जब उसने मेरी पकड़ी कलाई,

सखी मल गयो मेरे मुख पे गुलाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

मेरी चुनर पे रंग गयो डाल,

यशोदा को लाल वो तो नन्द जी को लाल,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।