गोपाल मुरलिया वाले नंद लाल मुरलिया वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोपाल मुरलिया वाले नंद लाल मुरलिया वाले

श्री, राधा मेरी स्वामिनी, और मैं राधे कौ दास,

जनम, जनम मोहे दीजियो, श्री वृन्दावन को वास ॥)

गोपाल, मुरलिया वाले, नंद लाल, मुरलिया वाले ॥

श्री, राधा जीवन ॥।नीलमणि, गोपाल मुरलिया वालें ॥

हो, नंदलाल, मुरलिया वाले ॥

हो, नंदलाल, मुरलिया वाले ॥

हो, नंदलाल, मुरलिया वाले ॥

हो, गोपाल, मुरलिया वाले ॥

श्री, राधा जीवन ॥।नीलमणि, गोपाल मुरलिया वाले ॥

मेरा यार, नंद, नंदन हो चूका है ॥

वोह, जान, हो चूका है, ज़िगर हो चूका है ॥

ये सच जानिए, उसकी, हर एक अदा पर ॥

जो, कुछ पास था वोह, नज़र हो चूका है ॥

गोपाल, मुरलिया वाले, नंदलाल...

हो, राधे राधे...राधे राधे ॥

हो, राधे राधे...राधे राधे ॥

श्री, राधे राधे...राधे राधे ॥

श्री, राधे राधे...राधे राधे ॥

श्री, राधे राधे...राधे राधे ॥

श्री, राधे राधे...राधे राधे ॥

श्री, राधे राधे...राधे राधे ॥

मेरा यार, नंद, नंदन हो चूका है ॥

वोह, जान, हो चूका है, ज़िगर हो चूका है ॥

जगत की, सभी, खूबियाँ मैंने छोड़ी ॥

जो, दिल था इधर, अब उधर हो चूका है ॥

गोपाल, मुरलिया वाले, नंदलाल...

गोविंद, मेरो है,गोपाल मेरो है ॥

श्री बाँके, बिहारी, नंदलाल मेरो है ॥

गोविंद, मेरो है,गोपाल मेरो है ॥

श्री बाँके, बिहारी, नंदलाल मेरो है ॥

हो राधा, राधा राधा ॥

श्री राधा, राधा राधा ॥

ओ नीली, साड़ी, राधा ।

ओ नीली, साड़ी... राधा ।

बरसाने, वाली... राधा ॥

ऊंची अटारी... राधा ॥

ओ भोली, भाली... राधा ॥

ओ गोरी, गोरी... राधा ॥

ओ चंचल, प्यारी... राधा ॥

ओ श्यामा, प्यारी... राधा ॥

राधा राधा, राधा राधा, रा...धा,

राधा, राधा श्री राधा ॥

जय जय श्री राधे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।