साधो सो सतगुरु मोहिं भावै

पारंपरिक
श्री कृष्ण गुरु वाणी कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साधो सो सतगुरु मोंहि भावै।

सत्त प्रेम का भर भर प्याला,आप

पिवै मोंहि प्यावै।

साधो सो सतगुरु मोहिं भावै...

परदा दूर करै आँखिन का,ब्रह्म

दरस दिखलावै।

जिस दरसन में सब लोक दरसै,

अनहद सबद सुनावै।

साधो सो सतगुरु मोहिं भावै...

एकहि सब सुख-दु:ख दिखलावै,

सबद में सुरत समावै।

कहैं कबीर ताको भय नाहीं,

निर्भय पद परसावै।

साधो सो सतगुरु मोहिं भावै...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।