दिल में ना जाने सतगुरु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिल में ना जानें सतगुरु,क्या रंग भर दिया है

छोड़ेंगे हम ना दर तेरा,इकरार कर लिया है

दिल में ना जानें सतगुरु...

जिस दिन से पी लिया है,तेरे नाम का ये प्याला

मुझको ख़बर नहीं है,मेरा दिल किधर गया है

दिल में ना जानें सतगुरु,क्या रंग भर दिया है

छोड़ेंगे हम ना दर तेरा,इकरार कर लिया है

दिल में ना जानें सतगुरु...

तुन्हें हाथ जिसका थामा,बन्दां बना प्रभु का

हुई नज़र जिस पे तेरी,समझों के तर गया है

दिल में ना जानें सतगुरु,क्या रंग भर दिया है

छोड़ेंगे हम ना दर तेरा,इकरार कर लिया है

दिल में ना जानें सतगुरु...

महफ़िल वही है जिसमें,चर्चा रहे तुम्हारी

अपना वही है जिसने,जीकर तेरा किया है

दिल में ना जानें सतगुरु,क्या रंग भर दिया है

छोड़ेंगे हम ना दर तेरा,इकरार कर लिया है

दिल में ना जानें सतगुरु...

तेरी चरन धुली जबसे,मस्तक को छु गई है

नज़रें बदल गई है,जीवन संवर गया है

दिल में ना जानें सतगुरु,क्या रंग भर दिया है

छोड़ेंगे हम ना दर तेरा,इकरार कर लिया है

दिल में ना जानें सतगुरु...

सजदा किसी के आगे,अब तककिया नहीं था

सजदा जो अब किया है,तो सर ही रख दिया है

दिल में ना जानें सतगुरु,क्या रंग भर दिया है

छोड़ेंगे हम ना दर तेरा,इकरार कर लिया है

दिल में ना जानें सतगुरु...

श्री गुरु शरणम जय गुरू शरणम

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।