मोहन का ठिकाना क्या जाने

प्रकाश तिवारी मधुर ॥
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहन का ठिकाना क्या जाने

जो वृंदावन में आए नहीं, मोहन का ठिकाना क्या जाने?

जो इन गलियों में आए नहीं, मेरे श्याम को पाना क्या जाने

प्रेम गली अति सांकरी है,

कैसे मिलना हो मोहन से.. ॥2 ॥

जो मोहन को दिल में बसाया नहीं,

वो दिल का लगाना क्या जाने ..

जो इन गलियों में आए नहीं,

मेरे श्याम को पाना क्या जाने

वृंदावन की इन गलियों में,

श्यामा के चरण पड़े तो होंगे ,

और श्याम भी यहीं चले होंगे,

जिसने कभी प्रेम से पुकारा नहीं,

मेरे श्याम का आना क्या जाने,

जो इन गलियों में आए नहीं,

मेरे श्याम को पाना क्या जाने

विष अमृत सा मीरा पी गई ।

श्याम दीवानी मीरा जी गई ॥2॥

मीरा सा कोई अमृत की तरह,

विष का पी जाना क्या जाने..

जो इन गलियों में आए नहीं,

मेरे श्याम को पाना क्या जाने

गीतकार , संगीतकार ,

गायक - प्रकाश तिवारी मधुर ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।