भोले की आई बारात बाराती भूत और पिशाच

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले की आई बारात

बाराती भूत और पिशाच

देखो लग रहा भूतों का डेरा

गुरु के संग में आया है चेरा

भस्मि उड़े जैसे उड़े हैं गुलाल

भोले की आई बारात ...

आगे आगे सप्तऋषि है

पीछे पीछे देव है सारे

बीच में नाचे है बेताल

भोले की आई बारात ...

नदी पर मेरे बैठे है भोले

सब मिलकर हर हर ये बोले

नाचे हैं घूम-घूम ताल

भोले की आई बारात ...

Lyrics - ।ucky Shuk।a

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।