नंदी ले चल काशी धाम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नंदी ले चल काशी धाम

जहां बिराजे भोले बाबा

गोर जी के साथ

नदी ले चल काशी धाम

जटा में उनकी गंगा बिराजे

उनकी जटा में बहती रहती

गंगा की यह धार

नदी ले चल काशी धाम

गले में उनके सांपों की माला

उनके गले में लिपटा रहता

दिन भर काला नाग

ओ नंदी ले चल काशी धाम

हाथों में उनके डमरू बिराजे

उनके हाथों में बजता रहता डमरू

चारों धाम ओ नंदी ले चल काशी धाम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।