मुझे कहां मिलेंगे भोलेनाथ नंदी बोल ज़रा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मुझे कहाँ मिलेंगे भोलेनाथ नंदी बोल ज़रा

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी बोल ज़रा ॥

बोल, ज़रा ओ नंदी, बोल ज़रा ॥

मैं तो ढूँढूँ, दिन और रात, नंदी बोल ज़रा ॥

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

पर्वत, नदियों में, जाकर ढूँढा ॥

सागर, से भी, मैंने पूछा ॥

वो तो गंगा, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

नाग, लोक में, जाकर ढूँढा ॥

सर्पों, से भी, मैंने पूछा ॥

वो तो नाग़, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

नील, गगन में, जाकर ढूँढा ॥

तारों, से भी, मैंने पूछा ॥

वो तो चंदा, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

बागों, में भी, जाकर ढूँढा ॥

फ़ूल और, कलियों से भी, मैंने पूछा ॥

वो तो भंगिया, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥

वो तो भंगिया ले गये साथ, नंदी बोल जरा,

कीर्तन, में भी, जाकर ढूँढा ॥

भक्तों, से भी, मैंने पूछा ॥

वो तो डमरू, ले गए साथ, नंदी बोल ज़रा ॥

मुझे कहाँ, मिलेंगे भोलेनाथ, नंदी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।