ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

लम्बी सी वो जाता बना रहा,

जुड़ा कास के बांधा, मेरा बाबा भोले नाथ

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

मोती मोती आखियो में झीना झीना कजरा,

यो लाली लगा रहा मेरा बाबा भोले नाथ,

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

धोले मखमल का कुरता पहन रहा.

यो चुनरी ओढ़ रहा लाल, मेरा बाबा भोले नाथ

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

कंद का तो उने दमन पहन लिया,

यो कस के बंधा नाडा , मेरा बाबा भोले नाथ

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

पायं में उने पायल पहन ली ,

सुर्खी लगा रहा लाल, मेरा बाबा भोले नाथ

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

नाच नाच के आया पसीना,

यो सारा मेकअप झड गया , मेरा बाबा भोले नाथ

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

जब किरशन ने बेरा पाटा,

यो भोला चाले कर गया, मेरा बाबा भोले नाथ

ब्रिज में गोपी बनगया , मेरा बाबा भोले नाथ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।