भोले बाबा की निकली सवारी , सब नाच रहे नर नारी,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले बाबा की निकली सवारी ,

सब नाच रहे , नर नारी,

आगे आगे देव चल रहे ,

पीछे चल रहे हैं त्रिपुरारी ,

सब नाच रहे नर नारी ,

भोले बाबा की निकली सवारी ,

सब नाच रहे , नर नारी ,

हाथ में डमरू, शीश पे चंदा ,

गले में उनके नाग भुजंगा ,

नन्दी पे बैठे हैं त्रिपुरारी ,

सब नाच रहे नर नारी ,

भोले बाबा की निकली सवारी ,

सब नाच रहे , नर नारी ,

जल्दी चलो जरा नन्दी बाबा ,

बेचैन हैं आज भोले बाबा ,

आज मिलन की आई हैं बारी ,

सब नाच रहे नर नारी ,

भोले बाबा की निकली सवारी ,

सब नाच रहे , नर नारी ,

सज धज कर गोरी मय्या खड़ी हैं,

थाल सजाकर मेना देवी भी खड़ी हैं ,

अब आरती करने की आई बारी ,

सब नाच रहे नर नारी ,

भोले बाबा की निकली सवारी ,

सब नाच रहे , नर नारी ,

बाबा और मय्या दोनों खड़े हैं ,

दोनों के मन आज फिर से जुड़े हैं ,

अब मिलन की आई हैं बारी ,

सब नाच रहे नर नारी ,

भोले बाबा की निकली सवारी ,

सब नाच रहे , नर नारी ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।